स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल: एम्स में 1,939 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती और तकनीक के जरिए कार्यभार घटाने पर जोर

स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल: एम्स में 1,939 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती और तकनीक के जरिए कार्यभार घटाने पर जोर

भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने ‘नर्सिंग ऑफिसर रिक्रूटमेंट कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट’ (NORCET) 2025 के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत कुल 1,939 नर्सिंग अधिकारियों का चयन किया गया है, जो देश भर के विभिन्न केंद्रीय अस्पतालों में अपनी सेवाएं देंगे। यह भर्ती प्रक्रिया केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की उस रणनीतिक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नए बने एम्स और अन्य सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी को दूर करना है।

नर्सिंग स्टाफ की भर्ती और तैनाती

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस भर्ती अभियान के लिए लगभग 2,000 रिक्तियों का विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें एम्स नई दिल्ली के लिए लगभग 600 पद और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स-सीएपीएफआईएमएस) के लिए 300 पद शामिल थे। मई 2025 में जारी परिणामों के बाद, चयनित 1,939 उम्मीदवारों में से 595 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति विशेष रूप से एम्स नई दिल्ली के लिए की गई है, जबकि 288 अधिकारियों को एम्स-सीएपीएफआईएमएस में तैनात किया जाएगा।

मंत्रालय का मानना है कि अस्पतालों में नियमित और पर्याप्त स्टाफिंग सुनिश्चित करना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बेहद अनिवार्य है। यह कदम ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ (PMSSY) के तहत स्थापित नए संस्थानों को मजबूती प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नागपुर कॉन्क्लेव: सर्वोत्तम प्रथाओं और डिजिटल बदलाव पर मंथन

जहां एक ओर नियुक्तियों का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ (सर्वोत्तम प्रथाओं) को साझा करने के लिए एम्स नागपुर में दो दिवसीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया। इस कॉन्क्लेव में देश भर के एम्स (भोपाल, जम्मू, बिलासपुर, जोधपुर, पटना आदि) और रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

अपने संबोधन में जेपी नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक एम्स न केवल उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा का केंद्र है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य सेवा में नवाचार (Innovation) का भी नेतृत्व करना चाहिए। कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य रोगी-केंद्रित देखभाल, परिचालन दक्षता और डिजिटल परिवर्तन जैसे विषयों पर विभिन्न संस्थानों के अनुभवों को साझा करना था। स्वास्थ्य सचिव सुश्री पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने भी अपने उद्घाटन भाषण में इन संस्थानों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बताया।

नर्सिंग में तकनीक और एआई की भूमिका

सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में अस्पतालों के सामने नर्सिंग स्टाफ की कमी और बढ़ते काम का दबाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस समस्या से निपटने के लिए अब अस्पताल प्रशासन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), चैटबॉट्स और स्वचालन (Automation) जैसी तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। इसका उद्देश्य नर्सों को कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक कार्यों से मुक्त करना है, ताकि वे अपना अधिकतम समय मरीजों की देखभाल में लगा सकें।

एशियन हॉस्पिटल एंड मेडिकल सेंटर के प्रेसिडेंट और सीईओ डॉ. बीवर टेम्सिस के अनुसार, अस्पतालों को नर्सिंग को सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु मानना होगा। उनका कहना है कि नर्सों के प्रशिक्षण को बेहतर बनाकर और उन्हें करियर में आगे बढ़ने के अवसर देकर ही उन्हें लंबे समय तक रोका जा सकता है। उन्होंने इसे एक दीर्घकालिक चुनौती बताते हुए कहा कि तकनीक का समझदारी से उपयोग नर्सों के कार्यभार को कम करने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

बारकोडिंग और डिजिटल समाधानों से बढ़ी दक्षता

अस्पतालों में तकनीक के इस्तेमाल का एक बेहतरीन उदाहरण ‘बारकोडिंग सिस्टम’ है। डॉ. टेम्सिस बताते हैं कि मरीजों की पहचान और उन्हें सही दवा देने के लिए बारकोडिंग का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल मेडिकल त्रुटियों की संभावना कम होती है, बल्कि दस्तावेज़ीकरण (Documentation) की प्रक्रिया भी तेज और सटीक हो जाती है। यह नर्सों के लिए उस थकाऊ कागजी काम को खत्म करता है, जिसमें उनका काफी समय बर्बाद होता था।

इसके अलावा, अपॉइंटमेंट बुकिंग और फ्रंट-डेस्क के काम को सुव्यवस्थित करने के लिए चैटबॉट्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। अब मरीज प्रयोगशाला परीक्षणों, सीटी स्कैन या इकोकार्डियोग्राम जैसी सेवाओं के लिए चैट या ऑनलाइन कॉल के माध्यम से अपनी बुकिंग करा सकते हैं।

इन तकनीकी बदलावों को महज एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत के तौर पर देखा जा रहा है। जब तकनीक प्रशासनिक बोझ उठाएगी, तभी नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सक उस कार्य पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे जो सबसे ज्यादा मायने रखता है—यानी मरीज के साथ समय बिताना और उसे बेहतर इलाज मुहैया कराना।

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